सारंगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
भैया राम खूंटे (INC) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 21.7% वोट पाकर सारंगढ़ सीट जीती और शमशेर सिंह साहिश (निर्दलीय) को 117 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 106 मालखरौदा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 106 जबलपुर मध्य है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सारंगढ़ का फ़ैसला सिर्फ़ 0.2% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 117 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भैया राम खूंटे | 11,88021.7% | |
| 2 | शमशेर सिंह साहिश निर्दलीय | निर्दलीय | 11,76321.5% |
| 3 | छबिलाल रात्रे | 11,35620.8% | |
| 4 | इंदु सारथी राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 9,92118.2% |
| 5 | पुरी राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4,2387.8% |
| 6 | गोसाई राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3424.3% |
| 7 | कान्ता राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1522.1% |
| 8 | प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 9231.7% |
| 9 | मोहन | 5030.9% | |
| 10 | घासीलाल कुर्रे निर्दलीय | निर्दलीय | 3540.7% |
| 11 | हरि राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2030.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 64% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.60 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सारंगढ़ से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 44.3% से बढ़कर 52.4% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।