चौरईविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
बैजनाथ प्रसाद सक्सेना (INC) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 38.8% वोट पाकर चौरई सीट जीती और मेहरसिंह महताबसिंह चौधरी (निर्दलीय) को 2,843 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 219 उदयपुरा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 219 रतलाम टाउन है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बैजनाथ प्रसाद सक्सेना | 12,46138.8% | |
| 2 | मेहरसिंह महताबसिंह चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 9,61830.0% |
| 3 | भगवानदास राठी (कान्ति दीन) जनता | जनता | 6,69220.8% |
| 4 | हरिराम भागीरथी व्हाटेवोअर निर्दलीय | निर्दलीय | 2,7878.7% |
| 5 | अशोक कुमार केशरी चन्द जैन वाम दल | वाम दल | 5501.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.43 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
चौरई से कौन जीता, 1977–1998
इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट INC(I) ने जीती।