तावडूविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
जाकिर हुसैन (INC) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 49.8% वोट पाकर तावडू सीट जीती और सूरज पाल (BJP) को 10,210 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 59 अटेली थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 59 बवानी खेड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जाकिर हुसैन | 45,12649.8% | |
| 2 | सूरज पाल NDA | NDA | 34,91638.5% |
| 3 | सुभाष चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 4,2794.7% |
| 4 | हिदायत खान | 4,2624.7% | |
| 5 | धर्मवीर HVP | HVP | 1,7862.0% |
| 6 | दीवान निर्दलीय | निर्दलीय | 910.1% |
| 7 | संजय निर्दलीय | निर्दलीय | 730.1% |
| 8 | अमर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 490.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BJP और एक निर्दलीय को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.49 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
तावडू से कौन जीता, 1977–2005
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1987 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1996 के 68.5% से बढ़कर 71.7% हो गया। इसके बाद 2005 के चुनाव में यह सीट INLD ने जीती।