तावडूविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
जाकिर हुसैन (निर्दलीय) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 39.0% वोट पाकर तावडू सीट जीती और सूरज पाल सिंह (BJP) को 5,900 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 59 अटेली थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 59 बवानी खेड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जाकिर हुसैन निर्दलीय | निर्दलीय | 28,51339.0% |
| 2 | सूरज पाल सिंह | 22,61330.9% | |
| 3 | राजेन्द्र JP | JP | 9,02412.3% |
| 4 | मोहम्मद याक़ूब खान जनता दल | जनता दल | 8,71611.9% |
| 5 | वली मोहम्मद | 3,3364.6% | |
| 6 | कन्हैया सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3750.5% |
| 7 | दीन मोहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 1280.2% |
| 8 | हनीफ निर्दलीय | निर्दलीय | 1160.2% |
| 9 | गफूर खान निर्दलीय | निर्दलीय | 780.1% |
| 10 | मुन्शी राम निर्दलीय | निर्दलीय | 670.1% |
| 11 | शकुन्तला निर्दलीय | निर्दलीय | 660.1% |
| 12 | रमाकांत | 540.1% | |
| 13 | रघुबीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 310.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 82% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.58 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
तावडू से कौन जीता, 1977–2005
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1987 के 78.9% से घटकर 66.3% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।