बल्लबगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 2000
राजिंदर सिंह बिसला (निर्दलीय) ने 2000 के विधान सभा चुनाव में 38.2% वोट पाकर बल्लबगढ़ सीट जीती और राम बिलास शर्मा (BJP) को 8,072 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 53 सोहना थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 53 नलवा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | राजिंदर सिंह बिसला निर्दलीय | निर्दलीय | 38,11238.2% |
| 2 | राम बिलास शर्मा NDA | NDA | 30,04030.1% |
| 3 | श्याम राज सिंह | 12,74612.8% | |
| 4 | सुभाष चौधरी | 8,7968.8% | |
| 5 | ब्रह्म नन्द कौशिक निर्दलीय | निर्दलीय | 3,3433.4% |
| 6 | नारायण प्रसाद | 2,3792.4% | |
| 7 | राज कुमार NDA | NDA | 1,2261.2% |
| 8 | रवि कान्त निर्दलीय | निर्दलीय | 9150.9% |
| 9 | राम कुमार उर्फ़ राज कुमार HVP | HVP | 7660.8% |
| 10 | सुरेन्द्र सिंह उर्फ़ सुरेन्द्र सिंह भाटी | 6000.6% | |
| 11 | दिनेश राघेल निर्दलीय | निर्दलीय | 5760.6% |
| 12 | नन्द किशोर निर्दलीय | निर्दलीय | 3760.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 81% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.81 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बल्लबगढ़ से कौन जीता, 1977–2005
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था। यह 1982 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 54.8% से बढ़कर 57.9% हो गया। इसके बाद 2005 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।