जगाधरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
ओम प्रकाश शर्मा (HVP) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 23.5% वोट पाकर जगाधरी सीट जीती और विशन लाल सैनी (BSP) को 1,645 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 6 मुलाना थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 6 मुलाना है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। ओम प्रकाश शर्मा 2.2% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ओम प्रकाश शर्मा HVP | HVP | 17,31623.5% |
| 2 | विशन लाल सैनी | 15,67121.2% | |
| 3 | बृज मोहन गुप्ता | 14,36419.5% | |
| 4 | राज कुमार सैनी JP | JP | 12,91917.5% |
| 5 | बाल कृष्ण गोयल | 8,96312.2% | |
| 6 | रमेश कश्यप निर्दलीय | निर्दलीय | 2,1672.9% |
| 7 | चमन लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 7471.0% |
| 8 | मोहन निर्दलीय | निर्दलीय | 6780.9% |
| 9 | धर्म वीर निर्दलीय | निर्दलीय | 4770.7% |
| 10 | मान सिंह | 2380.3% | |
| 11 | बृज मोहन पुत्र माधो राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1270.2% |
| 12 | हरनाम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1240.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 64% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.42 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जगाधरी से कौन जीता, 1977–2005
HVP ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह HVP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 75.0% से घटकर 70.0% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में भी HVP ने यह सीट अपने पास रखी।