डिचोलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1984
प्रभु झांट्ये हरीश नारायण (INC) ने 1984 के विधान सभा चुनाव में 57.3% वोट पाकर डिचोली सीट जीती और नाईक विनायक वासुदेव (MAG) को 3,825 वोटों से हराया।
1984 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1989 से सीट नंबर 7 कलंगुट है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — प्रभु झांट्ये हरीश नारायण 25.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रभु झांट्ये हरीश नारायण | 8,60757.3% | |
| 2 | नाईक विनायक वासुदेव | 4,78231.8% | |
| 3 | तेली अनंत रामचंद्र निर्दलीय | निर्दलीय | 4412.9% |
| 4 | गाडेकर कमलाकांत कृष्ण | 4292.9% | |
| 5 | मलिक प्रभाकर अनंत निर्दलीय | निर्दलीय | 2651.8% |
| 6 | नाईक गोपी दत्ताराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1921.3% |
| 7 | राऊत वामान गोपाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1681.1% |
| 8 | आमोणकर मोहनदास गोविन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 1491.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, MAG और एक निर्दलीय को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.32 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डिचोली से कौन जीता, 1977–1984
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 80.5% से घटकर 73.0% रह गया।