बिक्रमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1995
रामनाथ यादव (CPI) ने 1995 के विधान सभा चुनाव में 34.4% वोट पाकर बिक्रम सीट जीती और सी.पी. ठाकुर (INC) को 336 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 212 आरा थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 212 भभुआ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
बिक्रम का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 336 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
28 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रामनाथ यादव वाम दल | वाम दल | 41,40934.4% |
| 2 | सी.पी. ठाकुर | 41,07334.1% | |
| 3 | राम जनम शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 14,08311.7% |
| 4 | शिव पूजन CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 8,2646.9% |
| 5 | अशोक सिंह | 4,0613.4% | |
| 6 | उषा देवी | 2,0961.7% | |
| 7 | सीताराम राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6271.4% |
| 8 | सिकन्दर बादशाह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0120.8% |
| 9 | मीना देवी निर्दलीय | निर्दलीय | 8970.8% |
| 10 | सिद्धनी कुमार राय निर्दलीय | निर्दलीय | 7810.7% |
| 11 | विनोद कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 6900.6% |
| 12 | बरजेश कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 4080.3% |
| 13 | अशोक कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 3800.3% |
| 14 | सुरेश सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3790.3% |
| 15 | सुरेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3510.3% |
| 16 | सुरेश महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 3420.3% |
| 17 | अजय कुमार सिंह वाम दल | वाम दल | 3000.3% |
| 18 | राम लड्डू प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 2850.2% |
| 19 | तपेश्वर कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 2770.2% |
| 20 | चुन्नू यादव | 2470.2% | |
| 21 | लाल बाबू शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 2440.2% |
| 22 | चंद्रधारी सिंह | 2190.2% | |
| 23 | राम बृक्ष सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2060.2% |
| 24 | हरिहर नाथ प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 1440.1% |
| 25 | सुधीर कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1400.1% |
| 26 | अमरीका पासवान निर्दलीय | निर्दलीय | 1170.1% |
| 27 | अजय कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1160.1% |
| 28 | आनन्द कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1090.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.91 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बिक्रम से कौन जीता, 1977–2000
CPI ने यहाँ लगातार चौथी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1980 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 24.9% से बढ़कर 34.4% हो गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1990 के 66.0% से घटकर 63.4% रह गया। इसके बाद 2000 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।