लौरियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
शत्रु मर्दान सही (SWA) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 45.9% वोट पाकर लौरिया सीट जीती और अश्विनी कुमार मित्र (INC) को 6,642 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में भी सीट नंबर 6 का नाम लौरिया था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 6 का नाम अब भी लौरिया है, अब नई सीमाओं के साथ। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शत्रु मर्दान सही 18.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शत्रु मर्दान सही स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 16,64845.9% |
| 2 | अश्विनी कुमार मित्र | 10,00627.6% | |
| 3 | लक्ष्मी प्रसाद Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 7,63221.1% |
| 4 | जुवार आलम ज़फ़री | 1,2923.6% | |
| 5 | सोवरन बैठा | 4671.3% | |
| 6 | शुभ नारायण प्रसाद LTC | LTC | 2170.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.01 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
लौरिया से कौन जीता, 1967–1972
SWA ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 45.4% से घटकर 44.2% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।