पातेपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
पलटन राम (SSP) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 58.8% वोट पाकर पातेपुर सीट जीती और मीरा देवी (INC) को 15,192 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 51 जंदाहा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 51 लालगंज है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — पलटन राम 31.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पलटन राम | 28,25158.8% | |
| 2 | मीरा देवी | 13,05927.2% | |
| 3 | जगदेव दास | 4,2108.8% | |
| 4 | मोतीलाल रजाक Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 1,7083.6% |
| 5 | योगेन्द्र दास बिजन SHD | SHD | 3320.7% |
| 6 | रामपरिछन महरा | 2370.5% | |
| 7 | वाना दास BPS | BPS | 2370.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SSP, INC और PSP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.33 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पातेपुर से कौन जीता, 1967–1972
SSP ने 1967 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 47.7% से बढ़कर 58.8% हो गया। मतदान प्रतिशत 1967 के 38.2% से बढ़कर 47.8% हो गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट CPI ने जीती।