चकाईविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1969
श्रीकृष्ण सिंह (SSP) ने 1969 के विधान सभा चुनाव में 43.1% वोट पाकर चकाई सीट जीती और सच्चिदानन्द राय (INC) को 4,249 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 169 झाझा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 169 गोपालपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | श्रीकृष्ण सिंह | 15,38943.1% | |
| 2 | सच्चिदानन्द राय | 11,14031.2% | |
| 3 | फाल्गुनी प्रसाद यादव Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 5,60815.7% |
| 4 | पंचानन्द सिंह | 1,7184.8% | |
| 5 | विशेश्वर महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0903.1% |
| 6 | यमुना प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 7162.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.20 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
चकाई से कौन जीता, 1967–1972
SSP ने 1967 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 51.3% से घटकर 43.1% रह गया। मतदान प्रतिशत 1967 के 36.3% से बढ़कर 40.0% हो गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।