पलाशबाड़ीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2011
जतीन माली (निर्दलीय) ने 2011 के विधान सभा चुनाव में 34.7% वोट पाकर पलाशबाड़ी सीट जीती और प्रणब कलिता (निर्दलीय) को 680 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 50 बरपेटा थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 50 मंगलदोई है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पलाशबाड़ी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 680 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जतीन माली निर्दलीय | निर्दलीय | 36,71834.7% |
| 2 | प्रणब कलिता निर्दलीय | निर्दलीय | 36,03834.0% |
| 3 | निवा शर्मा ठाकुरिया UPA | UPA | 19,99318.9% |
| 4 | अनूप कु. मेधी | 10,57710.0% | |
| 5 | हेमांगा ठाकुरिया NDA | NDA | 1,9531.8% |
| 6 | ललिता बैश्य UPA | UPA | 5930.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 88% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
उम्मीदवारों ने क्या घोषित किया
उम्मीदवारों ने अपने चुनावी हलफ़नामों में आपराधिक मामले घोषित किए दर्ज मामलों का मतलब सज़ा नहीं है — किसी लंबित मामले से कोई दोषी साबित नहीं होता।
घोषित संपत्ति का मध्य मान ₹0.47 करोड़ आधे उम्मीदवारों की संपत्ति इससे कम है।
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पलाशबाड़ी से कौन जीता, 1978–2021
2006 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2006 के 83.4% से घटकर 81.2% रह गया। इसके बाद 2016 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1978हरेन्द्र गोस्वामी (JNP), जीत का अंतर 7.3%
- 1983मोहन बसुमतारी (INC), निर्विरोध निर्वाचित
- 1985जतीन माली (IND), जीत का अंतर 76.3%
- 1991जतीन माली (AGP), जीत का अंतर 21.2%
- 1996जतीन माली (AGP), जीत का अंतर 41.3%
- 2001प्रणब कलिता (IND), जीत का अंतर 0.8%
- 2006प्रणब कलिता (IND), जीत का अंतर 10.8%
- 2011जतीन माली (IND), जीत का अंतर 0.6%
- 2016प्रणब कलिता (BJP), जीत का अंतर 40.1%
- 2021हेमांगा ठाकुरिया (BJP), जीत का अंतर 30.1%