धेमाजीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
दिलीप कुमार सैकिया (AGP) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 29.3% वोट पाकर धेमाजी सीट जीती और सुमित्रा पटीर (INC) को 481 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 113 उत्तर लखीमपुर थी। 2021 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2026 से सीट नंबर 113 हाफलोंग है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
धेमाजी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 481 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | दिलीप कुमार सैकिया NDA | NDA | 31,16629.3% |
| 2 | सुमित्रा पटीर | 30,68528.8% | |
| 3 | देबज्योति बोरा निर्दलीय | निर्दलीय | 26,39924.8% |
| 4 | उपेन पांगिंग | 11,71711.0% | |
| 5 | घन सोणोवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0591.9% |
| 6 | पूर्ण कान्ता पेगु | 1,4621.4% | |
| 7 | रजनी करदोंग निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2581.2% |
| 8 | केशव कछारी UBNLF | UBNLF | 1,2011.1% |
| 9 | डॉ. मृदुल देउरी निर्दलीय | निर्दलीय | 6190.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 83% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.12 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2026 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2026 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
धेमाजी से कौन जीता, 1978–2021
AGP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1991 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 39.7% से घटकर 29.3% रह गया। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 1996 जितना ही रहा: 75.8%। इसके बाद 2006 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।
- 1978पूर्ण चन्द्र बोरा (IND), जीत का अंतर 1.4%
- 1983दुर्गेश्वर पटीर (INC), जीत का अंतर 46.6%
- 1985दिलीप कुमार सैकिया (IND), जीत का अंतर 41.4%
- 1991दिलीप कुमार सैकिया (AGP), जीत का अंतर 9.6%
- 1996दिलीप कुमार सैकिया (AGP), जीत का अंतर 12.3%
- 2001दिलीप कुमार सैकिया (AGP), जीत का अंतर 0.5%
- 2006सुमित्रा पटीर (INC), जीत का अंतर 6.3%
- 2011सुमित्रा डोले पटीर (INC), जीत का अंतर 5.2%
- 2016प्रदान बरुआ (BJP), जीत का अंतर 11.2%
- 2021रनोज पेगु (BJP), जीत का अंतर 15.9%