महाराजगंजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1967
बी. वी. पित्ती (SSP) ने 1967 के विधान सभा चुनाव में 46.3% वोट पाकर महाराजगंज सीट जीती और के. एस. गुप्ता (INC) को 6,056 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 207 जडचर्ला थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1978 से सीट नंबर 207 हिमायतनगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बी. वी. पित्ती | 19,07746.3% | |
| 2 | के. एस. गुप्ता | 13,02131.6% | |
| 3 | एच. आर. मोय्या Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 6,07714.8% |
| 4 | ओ. बी. सलाह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3413.3% |
| 5 | एम. जी. चारी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0262.5% |
| 6 | जे. ए. अंसारी निर्दलीय | निर्दलीय | 3920.9% |
| 7 | ए. आर. ए. गांधी निर्दलीय | निर्दलीय | 2300.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SSP, INC और BJS को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.96 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
महाराजगंज से कौन जीता, 1967–1972
इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।
- 1967बी. वी. पित्ती (SSP), जीत का अंतर 14.7%
- 1972एन. लक्ष्मी नारायण (INC), जीत का अंतर 3.0%