बनगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
पंकज घोष (CPM) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 44.9% वोट पाकर बनगांव सीट जीती और भूपेन्द्र नाथ सेठ (निर्दलीय) को 21,966 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 85 हाबड़ा थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 85 कृष्णनगर दक्षिण है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
14.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पंकज घोष वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 66,56144.9% |
| 2 | भूपेन्द्र नाथ सेठ निर्दलीय | निर्दलीय | 44,59530.1% |
| 3 | प्रोसांतो नाथ | 26,56717.9% | |
| 4 | किशोर बिस्वास | 4,5463.1% | |
| 5 | कल्याण मल्लिक | 3,2682.2% | |
| 6 | अशोक घोष PDS | PDS | 1,4241.0% |
| 7 | असीम बिस्वास AMB | AMB | 1,1860.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.07 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बनगांव से कौन जीता, 1977–2006
CPM ने 1996 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 47.8% से घटकर 44.9% रह गया। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1996 के 86.3% से घटकर 82.4% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में यह सीट AITC ने जीती।