बागदाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
कमलक्ष्मी बिस्वास (पुत्र कुटीश्वर) (FBL) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 45.6% वोट पाकर बागदा सीट जीती और दुलाल च. बर (AITC) को 237 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 84 देगंगा थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 84 नबद्वीप है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
बागदा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.2% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 237 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कमलक्ष्मी बिस्वास (पुत्र कुटीश्वर) वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 61,93645.6% |
| 2 | दुलाल च. बर | 61,69945.5% | |
| 3 | अरबिंद बिस्वास | 8,2886.1% | |
| 4 | चन्दन मल्लिक | 1,7151.3% | |
| 5 | बिश्वपति बिस्वास | 8130.6% | |
| 6 | शुभेंदु मंडल निर्दलीय | निर्दलीय | 3900.3% |
| 7 | कमलाक्षी बिस्वास (पुत्र किरण) निर्दलीय | निर्दलीय | 3510.3% |
| 8 | निर्मलेंदु राय निर्दलीय | निर्दलीय | 2680.2% |
| 9 | नानीगोपाल समद्दर निर्दलीय | निर्दलीय | 2060.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
FBL, AITC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.39 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बागदा से कौन जीता, 1977–2006
FBL ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1991 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 47.2% से घटकर 45.6% रह गया। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 88.8% से घटकर 85.4% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में यह सीट AITC ने जीती।
- 1977कमलक्ष्मी बिस्वास (FBL), जीत का अंतर 0.1%
- 1982कमलक्ष्मी बिस्वास (FBL), जीत का अंतर 2.3%
- 1987अपुर्व लाल मजूमदार (INC), जीत का अंतर 0.7%
- 1991कमलाक्षी बिस्वास (FBL), जीत का अंतर 6.1%
- 1996कमलाक्षी बिस्वास (FBL), जीत का अंतर 2.1%
- 2001कमलक्ष्मी बिस्वास (पुत्र कुटीश्वर) (FBL), जीत का अंतर 0.2%
- 2006दुलाल बर (AITC), जीत का अंतर 3.1%