विद्यासागरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
लक्ष्मी कान्ता दे (CPM) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 51.5% वोट पाकर विद्यासागर सीट जीती और महुआ मंडल (AITC) को 3,891 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 157 जगतबल्लभपुर थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 157 मटियाबुर्ज है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | लक्ष्मी कान्ता दे वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 33,99451.5% |
| 2 | महुआ मंडल | 30,10345.6% | |
| 3 | भगवान दास अग्रवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 5270.8% |
| 4 | सेफाली रानी साहा निर्दलीय | निर्दलीय | 4650.7% |
| 5 | लक्ष्मी नारायण बिस्वास निर्दलीय | निर्दलीय | 2000.3% |
| 6 | रत्ना बोस निर्दलीय | निर्दलीय | 1750.3% |
| 7 | शशि अग्रवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1730.3% |
| 8 | जितेन्द्र नाथ बनर्जी निर्दलीय | निर्दलीय | 1710.3% |
| 9 | दिपक सेन निर्दलीय | निर्दलीय | 1390.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM और AITC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.11 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
विद्यासागर से कौन जीता, 1977–2006
CPM ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1996 में जीता था; CPM ने यहाँ पिछली बार 1991 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 64.3% से घटकर 54.8% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी CPM ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1977समर कुमार रूद्र (CPM), जीत का अंतर 9.4%
- 1982लक्ष्मी कान्त दे (CPM), जीत का अंतर 8.8%
- 1987लक्ष्मी कान्ता दे (CPM), जीत का अंतर 7.8%
- 1991लक्ष्मी कान्ता दे (CPM), जीत का अंतर 8.8%
- 1996तापस राय (INC), जीत का अंतर 8.7%
- 2001लक्ष्मी कान्ता दे (CPM), जीत का अंतर 5.9%
- 2006अनादि कुमार साहू (CPM), जीत का अंतर 25.0%