तालतलाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
देबेश दास (CPM) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 47.0% वोट पाकर तालतला सीट जीती और दिलीप कुमार दास (AITC) को 834 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 154 हावड़ा दक्षिण थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 154 बेहाला पश्चिम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
तालतला का फ़ैसला सिर्फ़ 1.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 834 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | देबेश दास वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 37,02347.0% |
| 2 | दिलीप कुमार दास | 36,18946.0% | |
| 3 | कृष्ण पद मजूमदार | 3,0913.9% | |
| 4 | विनोद हेला निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0221.3% |
| 5 | सुमंत कुमार हीरा PBGM | PBGM | 5510.7% |
| 6 | सुकुमार मंडल निर्दलीय | निर्दलीय | 3510.5% |
| 7 | नारायण साहा निर्दलीय | निर्दलीय | 1870.2% |
| 8 | बिप्लब दास निर्दलीय | निर्दलीय | 1760.2% |
| 9 | सुधीर कुमार बिश्राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1700.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM, AITC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.30 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
तालतला से कौन जीता, 1977–2006
1977 से यहाँ हर चुनाव CPM ने जीता है: यह लगातार उसकी छठी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 53.6% से घटकर 47.0% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 70.8% से घटकर 57.1% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी CPM ने यह सीट अपने पास रखी।