हीरापुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
मुमताज हसन (JD) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 34.5% वोट पाकर हीरापुर सीट जीती और सुहृद बसु मल्लिक (INC) को 1,525 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 259 रायना थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 259 खंडघोष है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
हीरापुर का फ़ैसला सिर्फ़ 1.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 1,525 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मुमताज हसन | 30,20934.5% | |
| 2 | सुहृद बसु मल्लिक | 28,68432.7% | |
| 3 | प्रदीप मजूमदार | 25,61729.2% | |
| 4 | सुशांत ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 8551.0% |
| 5 | बिजय कुमार शर्मा | 7860.9% | |
| 6 | जयदेव सैम AMB | AMB | 5780.7% |
| 7 | मीरा गराई निर्दलीय | निर्दलीय | 3820.4% |
| 8 | सुधेश्वर राजभर | 2260.3% | |
| 9 | निर्मल मलिक निर्दलीय | निर्दलीय | 1470.2% |
| 10 | भागवत कुमार बनिक निर्दलीय | निर्दलीय | 1020.1% |
| 11 | जय शंकर चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 610.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.21 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हीरापुर से कौन जीता, 1977–2006
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1987 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1987 के 65.4% से घटकर 60.5% रह गया। इसके बाद 1996 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।