बरानगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
मतीश राय (RSP) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 50.6% वोट पाकर बरानगर सीट जीती और प्रणब कान्ति घोष (INC) को 7,179 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 137 कालीघाट थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 137 बारुईपुर पूर्व है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मतीश राय वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 61,45650.6% |
| 2 | प्रणब कान्ति घोष | 54,27744.7% | |
| 3 | प्रबोध रंजन राय निर्दलीय | निर्दलीय | 3,6053.0% |
| 4 | शंभू नाथ दत्त निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5071.2% |
| 5 | स्वपन मरीक निर्दलीय | निर्दलीय | 2170.2% |
| 6 | बाबू मुखार्जी निर्दलीय | निर्दलीय | 2150.2% |
| 7 | श्रीपति रंजन मजूमदार निर्दलीय | निर्दलीय | 1770.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
RSP और INC को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.19 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बरानगर से कौन जीता, 1977–2006
1977 से यहाँ हर चुनाव RSP ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 58.3% से घटकर 50.6% रह गया। मतदान प्रतिशत लगभग 1982 जितना ही रहा: 70.8%। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी RSP ने यह सीट अपने पास रखी।