सितारगंजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
नारायण पाल (BSP) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 39.3% वोट पाकर सितारगंज सीट जीती और कान्ता प्रसाद सागर (INC) को 8,437 वोटों से हराया।
2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 62 जसपुर है।
विजेता
10.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नारायण पाल | 31,74539.3% | |
| 2 | कान्ता प्रसाद सागर UPA | UPA | 23,30828.9% |
| 3 | खूब सिंह विकल NDA | NDA | 17,98222.3% |
| 4 | खजान चन्द्र | 4,6885.8% | |
| 5 | सूरज भान निर्दलीय | निर्दलीय | 9301.1% |
| 6 | प्रभु नाथ BJSH | BJSH | 6820.8% |
| 7 | सोहन लाल NDA | NDA | 4480.6% |
| 8 | विजय कुमार NNP | NNP | 4340.5% |
| 9 | विजय सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3030.4% |
| 10 | विजय शंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 2760.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.44 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सितारगंज से कौन जीता, 2002–2007
BSP ने 2002 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 35.9% से बढ़कर 39.3% हो गया। मतदान प्रतिशत 2002 के 61.2% से बढ़कर 73.5% हो गया।
- 2002नारायण पाल (BSP), जीत का अंतर 10.2%
- 2007नारायण पाल (BSP), जीत का अंतर 10.4%