नैनीतालविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
खड़क सिंह बोहरा (BJP) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 24.4% वोट पाकर नैनीताल सीट जीती और डॉ. नारायण सिंह जंतवाल (UKKD) को 367 वोटों से हराया।
2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 55 चम्पावत है।
विजेता
नैनीताल का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 367 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | खड़क सिंह बोहरा NDA | NDA | 12,34724.4% |
| 2 | डॉ. नारायण सिंह जंतवाल UKKD | UKKD | 11,98023.7% |
| 3 | जया बिष्ट UPA | UPA | 11,16422.1% |
| 4 | डॉ. हरीश सिंह बिष्ट UPA | UPA | 6,26712.4% |
| 5 | महेश भट्ट | 6,07912.0% | |
| 6 | हरीश चन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1132.2% |
| 7 | दीपक शाह BJSH | BJSH | 4660.9% |
| 8 | खुशाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4630.9% |
| 9 | ज़मीर अहमद JM | JM | 3090.6% |
| 10 | मोहन चन्द्र | 3070.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 70% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.11 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नैनीताल से कौन जीता, 2002–2007
BJP ने यह सीट UKKD से छीन ली, जिसने इसे 2002 में जीता था। मतदान प्रतिशत 2002 के 47.3% से बढ़कर 59.6% हो गया।
- 2002नारायण सिंह जंतीवाल (UKKD), जीत का अंतर 5.8%
- 2007खड़क सिंह बोहरा (BJP), जीत का अंतर 0.7%