पिंडरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
गोविन्द लाल (BJP) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 32.1% वोट पाकर पिंडर सीट जीती और भूपाल राम टम्टा (INC) को 3,133 वोटों से हराया।
2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 41 कोटद्वार है।
विजेता
8.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गोविन्द लाल NDA | NDA | 11,69532.1% |
| 2 | भूपाल राम टम्टा UPA | UPA | 8,56223.5% |
| 3 | डॉ. जीत राम UPA | UPA | 7,09019.4% |
| 4 | मगन लाल शाह UKKD | UKKD | 3,5439.7% |
| 5 | बलिराम | 1,6924.6% | |
| 6 | खेम राम | 1,4223.9% | |
| 7 | हरीश पंचवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0592.9% |
| 8 | प्रेम राम आर्य | 7172.0% | |
| 9 | धूमी लाल BJSH | BJSH | 7011.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 75% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.75 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पिंडर से कौन जीता, 2002–2007
BJP ने 2002 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 36.8% से घटकर 32.1% रह गया। मतदान प्रतिशत 2002 के 51.3% से बढ़कर 54.1% हो गया।
- 2002गोविन्द लाल (BJP), जीत का अंतर 6.2%
- 2007गोविन्द लाल (BJP), जीत का अंतर 8.6%