कोटद्वारविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2007
शैलेन्द्र सिंह रावत (BJP) ने 2007 के विधान सभा चुनाव में 46.2% वोट पाकर कोटद्वार सीट जीती और सुरेन्द्र सिंह नेगी (INC) को 900 वोटों से हराया।
2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 29 झबरेड़ा है।
विजेता
कोटद्वार का फ़ैसला सिर्फ़ 1.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 900 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवारनाम पर टैप करें
| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शैलेन्द्र सिंह रावत NDA | NDA | 26,90346.2% |
| 2 | सुरेन्द्र सिंह नेगी UPA | UPA | 26,00344.6% |
| 3 | दिनेश चन्द्र बलोधी | 2,4174.2% | |
| 4 | विपेन कोटनाला UKKD | UKKD | 8821.5% |
| 5 | महेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 7041.2% |
| 6 | सुरेन्द्र सिंह NDA | NDA | 6501.1% |
| 7 | कुलदीप सिंह | 4710.8% | |
| 8 | ओम प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 2380.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और BSP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.41 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कोटद्वार से कौन जीता, 2002–2007
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 2002 में जीता था। मतदान प्रतिशत 2002 के 53.1% से बढ़कर 60.9% हो गया।
- 2002सुरेन्द्र सिंह नेगी (INC), जीत का अंतर 26.7%
- 2007शैलेन्द्र सिंह रावत (BJP), जीत का अंतर 1.5%