रसड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1991
घुराबू (JD) ने 1991 के विधान सभा चुनाव में 25.5% वोट पाकर रसड़ा सीट जीती और राम बचन (INC) को 592 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 221 मेहनगर थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 221 धानापुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
रसड़ा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 592 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
13 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | घुराबू जनता दल | जनता दल | 20,50225.5% |
| 2 | राम बचन | 19,91024.8% | |
| 3 | मुनेश्वर | 13,88917.3% | |
| 4 | हर देव JP | JP | 11,79214.7% |
| 5 | अनिल | 11,72214.6% | |
| 6 | राघवेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 5510.7% |
| 7 | हरि नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 4780.6% |
| 8 | महा पीर निर्दलीय | निर्दलीय | 3470.4% |
| 9 | फूल चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 3020.4% |
| 10 | मैनेजर पासवान | 2280.3% | |
| 11 | देव मुनि निर्दलीय | निर्दलीय | 2190.3% |
| 12 | बीरेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2160.3% |
| 13 | कामता निर्दलीय | निर्दलीय | 2090.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 68% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.02 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रसड़ा से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 47.9% से घटकर 44.4% रह गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट BSP ने जीती।