बिसवांविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
पदमा सेठ (INC) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 29.3% वोट पाकर बिसवां सीट जीती और मुहम्मद सलाम (BSP) को 576 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में भी सीट नंबर 75 का नाम बिसवां था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 75 मल्लावां है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
बिसवां का फ़ैसला सिर्फ़ 0.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 576 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पदमा सेठ | 27,14029.3% | |
| 2 | मुहम्मद सलाम | 26,56428.6% | |
| 3 | रामसिंह | 20,85722.5% | |
| 4 | रामकुमार भार्गव राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 16,36717.6% |
| 5 | गया प्रसाद | 1,0281.1% | |
| 6 | दातादीन निर्दलीय | निर्दलीय | 3910.4% |
| 7 | विजयपाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3700.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.00 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बिसवां से कौन जीता, 1974–1996
INC ने 1985 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 46.9% से घटकर 29.3% रह गया। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 46.5% से बढ़कर 52.0% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1974गया प्रसाद मेहरोत्रा (BJS), जीत का अंतर 12.7%
- 1977गया प्रसाद मेहरोत्रा उर्फ़ मन्ने बाबू (JNP), जीत का अंतर 10.8%
- 1980राम कुमार भार्गव (INC(I)), जीत का अंतर 7.0%
- 1985पदमा सेठ (INC), जीत का अंतर 21.5%
- 1989पदमा सेठ (INC), जीत का अंतर 0.6%
- 1991पदमा सेठ (INC), जीत का अंतर 2.9%
- 1993सुन्दर पाल सिंह (SP), जीत का अंतर 7.8%
- 1996अजीत कुमार मेहरोत्रा (BJP), जीत का अंतर 9.4%