इगलासविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
विजेन्द्र सिंह (INC) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 43.9% वोट पाकर इगलास सीट जीती और राजेन्द्र सिंह (JD) को 64 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 375 अतरौली थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 375 हापुड़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
इगलास का फ़ैसला सिर्फ़ 0.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 64 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | विजेन्द्र सिंह | 37,25843.9% | |
| 2 | राजेन्द्र सिंह राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 37,19443.8% |
| 3 | हर पाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 5,5126.5% |
| 4 | रतन लाल | 4,4775.3% | |
| 5 | राज पाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2020.2% |
| 6 | राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1590.2% |
| 7 | नत्थी सिंह | 1100.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, JD और एक निर्दलीय को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.55 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
इगलास से कौन जीता, 1974–1996
INC ने यह सीट LKD से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 48.0% से बढ़कर 50.2% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।
- 1974राजेन्द्र सिंह (BKD), जीत का अंतर 14.9%
- 1977राजेन्द्र सिंह (JNP), जीत का अंतर 30.7%
- 1980राजेन्द्र सिंह (JNP(SC)), जीत का अंतर 2.1%
- 1985राजेन्द्र सिंह (LKD), जीत का अंतर 15.1%
- 1989विजेन्द्र सिंह (INC), जीत का अंतर 0.1%
- 1991ज्ञानवती सिंह (JD), जीत का अंतर 2.8%
- 1993विजेन्द्र सिंह (टोढा वाले) (INC), जीत का अंतर 10.4%
- 1996मलखान सिंह (BJP), जीत का अंतर 10.0%