कन्नौजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1989
कलियन सिंह दोहरे (JD) ने 1989 के विधान सभा चुनाव में 34.4% वोट पाकर कन्नौज सीट जीती और बिहारी लाल दोहरे (INC) को 502 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1969 में सीट नंबर 308 लखना थी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2002 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2002 से सीट नंबर 308 चरखारी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कन्नौज का फ़ैसला सिर्फ़ 0.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 502 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कलियन सिंह दोहरे राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 32,45834.4% |
| 2 | बिहारी लाल दोहरे | 31,95633.9% | |
| 3 | झाई लाल अहिरकर | 25,98527.6% | |
| 4 | अरुण कुमार | 1,1481.2% | |
| 5 | विश्वनाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1281.2% |
| 6 | श्रीपाल | 1,0391.1% | |
| 7 | बनवारी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3200.3% |
| 8 | राम प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 2350.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.23 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कन्नौज से कौन जीता, 1974–1996
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1974 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 33.1% से बढ़कर 51.5% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।
- 1974झाम लाल अहिरवार (BJS), जीत का अंतर 5.9%
- 1977जान लाल अहिरवार (JNP), जीत का अंतर 22.1%
- 1980बिहारी लाल दोहरे (INC(I)), जीत का अंतर 38.0%
- 1985बिहारी लाल दोहरे (INC), जीत का अंतर 19.4%
- 1989कलियन सिंह दोहरे (JD), जीत का अंतर 0.5%
- 1991बनवारी लाल दोहरे (BJP), जीत का अंतर 0.1%
- 1993बनवारी लाल दोहरे (BJP), जीत का अंतर 9.4%
- 1996बनवारी लाल दोहरे (BJP), जीत का अंतर 0.7%