हार्बरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2001
अनबऴगन के. (DMK) ने 2001 के विधान सभा चुनाव में 47.0% वोट पाकर हार्बर सीट जीती और पांडियन डी. (CPI) को 336 वोटों से हराया। ऴ: तमिल और मलयालम की 'ழ' / 'ഴ' ध्वनि (ल और ड़ के बीच की है)
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1971 में भी सीट नंबर 2 का नाम हार्बर था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 2 पोन्नेरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
हार्बर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 336 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अनबऴगन के. NDA | NDA | 24,22547.0% |
| 2 | पांडियन डी. | 23,88946.3% | |
| 3 | पांडियन ई.बी. | 2,2394.3% | |
| 4 | चंद्रकुमार डी. PB | PB | 4900.9% |
| 5 | आर.टी. रत्नकुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 4040.8% |
| 6 | पी.एन. श्रीनिवासलु निर्दलीय | निर्दलीय | 3160.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
DMK और CPI को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.29 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हार्बर से कौन जीता, 1977–2006
1977 से यहाँ हर चुनाव DMK ने जीता है: यह लगातार उसकी सातवीं जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 70.6% से घटकर 47.0% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1996 के 53.9% से घटकर 39.9% रह गया। इसके बाद 2006 के चुनाव में भी DMK ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1977ए. सेल्वराजन (DMK), जीत का अंतर 9.2%
- 1980सेल्वरासन, ए. (DMK), जीत का अंतर 18.2%
- 1984ए. सेल्वरासन (DMK), जीत का अंतर 11.8%
- 1989एम. करुणानिधि (DMK), जीत का अंतर 45.9%
- 1991करुणानिधि एम. (DMK), जीत का अंतर 1.4%
- 1996अनबऴगन, के. (DMK), जीत का अंतर 54.4%
- 2001अनबऴगन के. (DMK), जीत का अंतर 0.7%
- 2006अनबऴगन के. (DMK), जीत का अंतर 0.7%