हार्बरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
ए. एम. मोहिदीन (निर्दलीय) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 49.4% वोट पाकर हार्बर सीट जीती और उमापति जी. (NCO) को 486 वोटों से हराया।
1971 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 2 का नाम अब भी हार्बर है, अब नई सीमाओं के साथ।
विजेता
हार्बर का फ़ैसला सिर्फ़ 0.8% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 486 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
3 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ए. एम. मोहिदीन निर्दलीय | निर्दलीय | 29,22549.4% |
| 2 | उमापति जी. | 28,73948.6% | |
| 3 | अबीबुल्ला बेग निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1511.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और NCO को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
ऴ: तमिल और मलयालम की 'ழ' / 'ഴ' ध्वनि (ल और ड़ के बीच की है)