कांग्रेस सबसे आगे, फिर भी बहुमत नहीं
क्या हुआ
त्रावणकोर-कोचीन के दूसरे चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी रही, लेकिन किसी पार्टी के पास बहुमत नहीं था।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 117 सीटों में से 45 सीटें जीतीं।
इससे वह 59 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई, यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) सदन।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 23 सीटें जीतीं।
क्या बदला
सबसे बड़ा बदलाव दूसरे स्थान पर हुआ, जहाँ एक नई पार्टी ने जगह बनाई।
इस बार कांग्रेस ने 45 सीटें जीतीं, जो पिछली बार की 44 सीटों से बस थोड़ी ज़्यादा थीं।
भाकपा ने त्रावणकोर-कोचीन में पहली बार सीटें जीतीं और 23 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कोतमंगलम, त्रावणकोर-कोचीन में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 104 वोट रहा।
सबसे बड़ी जीत थिरुवट्टार, त्रावणकोर-कोचीन में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 77.8% आगे रहा।
पूरे राज्य में लगभग 74.4% पंजीकृत मतदाता वोट डालने आए — त्रावणकोर-कोचीन में दर्ज अब तक का सबसे ऊँचा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला)।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला देवीकुलम, त्रावणकोर-कोचीन में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
त्रावणकोर-कोचीन ख़ुद एक नया राज्य था, जिसे कुछ साल पहले पुरानी रियासतों को मिलाकर बनाया गया था।