संगरियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
कृष्ण चन्द्र (INC) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 24.7% वोट पाकर संगरिया सीट जीती और गुरजंट सिंह पुत्र मेवा सिंह (निर्दलीय) को 79 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 5 गंगानगर थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 5 रायसिंहनगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
संगरिया का फ़ैसला सिर्फ़ 0.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 79 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कृष्ण चन्द्र | 31,12724.7% | |
| 2 | गुरजंट सिंह पुत्र मेवा सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 31,04824.7% |
| 3 | अभय सिंह | 21,63317.2% | |
| 4 | हतराम बेनीवाल | 20,29016.1% | |
| 5 | कृष्ण कुमार NDA | NDA | 13,10010.4% |
| 6 | जोत राम मारवाल | 6,7135.3% | |
| 7 | रूप सिंह पतली निर्दलीय | निर्दलीय | 9860.8% |
| 8 | गुरजंट सिंह पुत्र बसंत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 7620.6% |
| 9 | महेंदर कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1850.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 67% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.23 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
संगरिया से कौन जीता, 1977–2003
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1985 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 70.1% से बढ़कर 74.1% हो गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।