झुन्झुनूविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
सुमित्रा सिंह (निर्दलीय) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 43.1% वोट पाकर झुन्झुनू सीट जीती और बृजेन्द्र सिंह (INC) को 898 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 28 लक्ष्मणगढ़ थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 28 मंडावा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
झुन्झुनू का फ़ैसला सिर्फ़ 0.9% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 898 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुमित्रा सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 42,87443.1% |
| 2 | बृजेन्द्र सिंह | 41,97642.2% | |
| 3 | गुल मोहम्मद NDA | NDA | 11,89111.9% |
| 4 | लक्ष्मण कुमार शर्मा AIRJP | AIRJP | 7590.8% |
| 5 | फूल चन्द CPI(ML)(L) | CPI(ML)(L) | 7320.7% |
| 6 | बिहारीलाल भारतिया ABHM | ABHM | 6660.7% |
| 7 | इब्राहिम खान निर्दलीय | निर्दलीय | 4770.5% |
| 8 | महेन्द्र कुमार | 1930.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, INC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.65 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
झुन्झुनू से कौन जीता, 1977–2003
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 64.4% से बढ़कर 65.2% हो गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।