जैसलमेरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
जितेन्द्र सिंह (JD) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 37.9% वोट पाकर जैसलमेर सीट जीती और गोरधन दास (INC) को 2,063 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 181 मकराना थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 181 शाहपुरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। जितेन्द्र सिंह 2.3% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जितेन्द्र सिंह राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 34,34237.9% |
| 2 | गोरधन दास | 32,27935.6% | |
| 3 | जुगत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 19,48121.5% |
| 4 | राजेन्द्र निर्दलीय | निर्दलीय | 2,6212.9% |
| 5 | डूंगरा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1921.3% |
| 6 | मोहम्मद जुबेर निर्दलीय | निर्दलीय | 2700.3% |
| 7 | लूना राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2150.2% |
| 8 | किरण | 2030.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.15 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जैसलमेर से कौन जीता, 1977–2003
JD ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 51.7% से बढ़कर 57.6% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।