रेवदरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
टीकम चन्द कान्त (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 43.9% वोट पाकर रेवदर सीट जीती और छोगा राम बाकोलिया (INC) को 1,889 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 169 जोधपुर थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 169 चित्तौड़गढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। टीकम चन्द कान्त 3.4% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | टीकम चन्द कान्त | 24,58243.9% | |
| 2 | छोगा राम बाकोलिया | 22,69340.5% | |
| 3 | जेता राम कोली निर्दलीय | निर्दलीय | 4,0827.3% |
| 4 | मोती लाल राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 1,8553.3% |
| 5 | वीसा राम गुरु | 8071.4% | |
| 6 | वेला निर्दलीय | निर्दलीय | 4620.8% |
| 7 | कपूरा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4520.8% |
| 8 | जीवा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4200.8% |
| 9 | समर्थ राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2990.5% |
| 10 | बाबू लाल मेघवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1940.3% |
| 11 | चुनी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1870.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और एक निर्दलीय को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.75 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रेवदर से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 32.5% से बढ़कर 47.0% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।