जहाजपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
शिवजी राम (JD) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 42.1% वोट पाकर जहाजपुर सीट जीती और रतन लाल तांबी (INC) को 5,261 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 155 रेवदर थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 155 वल्लभ नगर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शिवजी राम राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 28,98942.1% |
| 2 | रतन लाल तांबी | 23,72834.4% | |
| 3 | राम प्रकाश अग्रवाल | 9,23413.4% | |
| 4 | बालू राम धाकड़ निर्दलीय | निर्दलीय | 4,6626.8% |
| 5 | देबी दास रेगर निर्दलीय | निर्दलीय | 7621.1% |
| 6 | राम प्रसाद मंडोवरा निर्दलीय | निर्दलीय | 6380.9% |
| 7 | तारा चन्द सोनी निर्दलीय | निर्दलीय | 3490.5% |
| 8 | सुलेमान निर्दलीय | निर्दलीय | 2920.4% |
| 9 | गोविन्द लाल पचेली निर्दलीय | निर्दलीय | 1740.3% |
| 10 | राज कुमार पगारिया निर्दलीय | निर्दलीय | 790.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.14 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जहाजपुर से कौन जीता, 1977–2003
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 50.7% से बढ़कर 59.2% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।