सागवाड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
कमला भील (INC) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 35.2% वोट पाकर सागवाड़ा सीट जीती और कंकमल कटारा (BJP) को 64 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 133 खेरवाड़ा थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 133 पोकरण है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सागवाड़ा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 64 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कमला भील | 21,38235.2% | |
| 2 | कंकमल कटारा | 21,31835.1% | |
| 3 | राम प्रसाद डेंडोर निर्दलीय | निर्दलीय | 11,16218.4% |
| 4 | कालू राम वाम दल | वाम दल | 4,1916.9% |
| 5 | मान सिंह रोत निर्दलीय | निर्दलीय | 9491.6% |
| 6 | हीरा लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 6721.1% |
| 7 | लाल शंकर LKD(B) | LKD(B) | 6401.1% |
| 8 | कान्ति लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3790.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.49 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सागवाड़ा से कौन जीता, 1977–2003
INC ने 1985 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 71.1% से घटकर 35.2% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 44.9% से बढ़कर 51.7% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।