कपासनविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
मोहन लाल चित्तौड़िया (JD) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 68.4% वोट पाकर कपासन सीट जीती और मोहन लाला जाट उसरोल (INC) को 28,015 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 123 पडवा थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 123 लोहावट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मोहन लाल चित्तौड़िया 43.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मोहन लाल चित्तौड़िया राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 43,96468.4% |
| 2 | मोहन लाला जाट उसरोल | 15,94924.8% | |
| 3 | मोहन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0143.1% |
| 4 | भेंरू लाल गुर्जर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2461.9% |
| 5 | प्यार चन्द | 4950.8% | |
| 6 | बलवंत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2570.4% |
| 7 | नरेन्द्र सिंह लोधा | 1990.3% | |
| 8 | गोपाल कृष्ण गोठवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1190.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JD और INC को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.88 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कपासन से कौन जीता, 1977–2003
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत लगभग 1985 जितना ही रहा: 50.7%। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।