पिड़ावाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
नफीस अहमद खान (JD) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 32.2% वोट पाकर पिड़ावा सीट जीती और नारायण सिंह पुत्र शिवदान सिंह (BJP) को 1,125 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 119 बांसवाड़ा थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 119 मारवाड़ जंक्शन है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
पिड़ावा का फ़ैसला सिर्फ़ 1.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 1,125 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
14 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नफीस अहमद खान राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 20,75832.2% |
| 2 | नारायण सिंह पुत्र शिवदान सिंह | 19,63330.4% | |
| 3 | इकबाल अहमद | 9,90915.4% | |
| 4 | जेवेंधर कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 6,3719.9% |
| 5 | अशोक निर्दलीय | निर्दलीय | 4,2706.6% |
| 6 | नारायण सिंह पुत्र केसर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0591.6% |
| 7 | धीरज कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 8491.3% |
| 8 | पूनम चन्द गुप्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 4380.7% |
| 9 | बिराधी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3280.5% |
| 10 | जानकी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2700.4% |
| 11 | प्रेम कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 2250.3% |
| 12 | नवनीत दास निर्दलीय | निर्दलीय | 1730.3% |
| 13 | भंवाल लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1420.2% |
| 14 | हीरा लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 740.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.26 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पिड़ावा से कौन जीता, 1977–2003
JD ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह JD की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 55.6% से बढ़कर 60.7% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।