कंडाघाटविधान सभा उपचुनाव का परिणाम, 1952
सुरेन्द्र सिंह (निर्दलीय) ने 1952 के विधान सभा उपचुनाव में 39.0% वोट पाकर कंडाघाट सीट जीती और रंजीत सिंह (निर्दलीय) को 7,138 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1954 से सीट नंबर 28 नारनौल है।
विजेता
14.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुरेन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 19,00239.0% |
| 2 | रंजीत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 11,86424.4% |
| 3 | आर. लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 5,51611.3% |
| 4 | वी. कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 4,1628.6% |
| 5 | जी. चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 3,7537.7% |
| 6 | शांति | 1,6363.4% | |
| 7 | बी.आर. दास निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1552.4% |
| 8 | एल. राम निर्दलीय | निर्दलीय | 9021.9% |
| 9 | एन. चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 6841.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 75% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.16 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1954 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1954 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कंडाघाट से कौन जीता, 1951
- 1951लेख राम (IND) और 1 अन्य: 2 सदस्यों वाली सीट