चुनाव की कहानी
क्या हुआ
पिछले चुनाव में बहुमत से पीछे रहने के बाद इस बार कांग्रेस ने साफ़ बहुमत जीता।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 60 में से 37 सीटें जीतीं — एक भारी जीत।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 6 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी अकाली (मान ग्रुप) सिर्फ़ 11 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
पिछले चुनाव में कांग्रेस से पीछे रहा विपक्ष इस चुनाव से पहले दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में बँट गया।
उनमें से एक, अकाली (मान ग्रुप), अपने दम पर सबसे बड़ा विपक्षी दल बन गया।
कांग्रेस की अपनी सीटें 26 से बढ़कर 37 हो गईं।
वोट डालने आए पंजीकृत मतदाताओं का हिस्सा भी पिछले चुनाव के मुक़ाबले 2.3 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला धनौला, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 4 वोट रहा।
सबसे बड़ी जीत नालागढ़, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 82.9% आगे रहा।
पूरे संघ में लगभग 61.7% पंजीकृत मतदाता वोट डालने आए।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला दादरी, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव पिछले, अनिर्णायक परिणाम के बाद चली राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद हुआ।