बांगिरिपोसीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
सुदाम चन्द्र मरांडी (निर्दलीय) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 28.4% वोट पाकर बांगिरिपोसी सीट जीती और पुरुषोत्तम नाईक (BJP) को 3,645 वोटों से हराया।
1974 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1971 में भी सीट नंबर 5 का नाम बांगिरिपोसी था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 5 भटली है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुदाम चन्द्र मरांडी निर्दलीय | निर्दलीय | 14,63328.4% |
| 2 | पुरुषोत्तम नाईक | 10,98821.4% | |
| 3 | बैद्यनाथ टुडू | 8,82817.1% | |
| 4 | मनमोहन टुडू राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 7,93315.4% |
| 5 | रूद्र मोहन दास वाम दल | वाम दल | 6,54912.7% |
| 6 | दमन हाँसदा JKD | JKD | 9851.9% |
| 7 | बिस्वनाथ माहली निर्दलीय | निर्दलीय | 8231.6% |
| 8 | दसमत मरांडी | 3930.8% | |
| 9 | सर्बेश्वर नाईक निर्दलीय | निर्दलीय | 2360.5% |
| 10 | रमानाथ दास निर्दलीय | निर्दलीय | 610.1% |
| 11 | रामजीत माझी निर्दलीय | निर्दलीय | 470.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 67% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.09 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बांगिरिपोसी से कौन जीता, 1974–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था। 1974 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 32.2% से बढ़कर 43.9% हो गया। इसके बाद 1995 के चुनाव में यह सीट JMM ने जीती।
- 1974रूद्र मोहन दास (CPI), जीत का अंतर 11.8%
- 1977पुरूषोत्तम नाईक (JNP), जीत का अंतर 17.8%
- 1980कंगोई सिंह (INC(I)), जीत का अंतर 52.0%
- 1985कंगोई सिंह (INC), जीत का अंतर 18.8%
- 1990सुदाम चन्द्र मरांडी (IND), जीत का अंतर 7.1%
- 1995अजेन मुर्मू (JMM), जीत का अंतर 1.5%
- 2000पुरूषोत्तम नाईक (IND), जीत का अंतर 2.4%
- 2004चैतन्य प्रसाद माझी (BJD), जीत का अंतर 5.4%