कविसूर्यनगरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1967
डी. स्वाईं (CPI) ने 1967 के विधान सभा चुनाव में 35.8% वोट पाकर कविसूर्यनगर सीट जीती और आर.जी. साहू (INC) को 671 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1961 में सीट नंबर 65 बिसरा थी। 1971 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1974 से सीट नंबर 65 जगन्नाथप्रसाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कविसूर्यनगर का फ़ैसला सिर्फ़ 1.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 671 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डी. स्वाईं वाम दल | वाम दल | 13,89535.8% |
| 2 | आर.जी. साहू | 13,22434.1% | |
| 3 | एस.एस. दास स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 6,34616.4% |
| 4 | टी.सी. पटनायक | 4,16610.7% | |
| 5 | जे. मिश्र निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1913.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.53 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कविसूर्यनगर से कौन जीता, 1967–1971
इसके बाद 1971 के चुनाव में भी CPI ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1967डी. स्वाईं (CPI), जीत का अंतर 1.7%
- 1971सदानंद महंती (CPI), जीत का अंतर 5.0%