तपकराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
विष्णु साय (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 54.6% वोट पाकर तपकरा सीट जीती और थियोडर एक्का (निर्दलीय) को 14,566 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 99 बिल्हा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 99 डिण्डोरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — विष्णु साय 27.7% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | विष्णु साय | 28,70154.6% | |
| 2 | थियोडर एक्का निर्दलीय | निर्दलीय | 14,13526.9% |
| 3 | गणेश साय निर्दलीय | निर्दलीय | 4,3358.3% |
| 4 | लालधर राम बैगा वाम दल | वाम दल | 2,9905.7% |
| 5 | परमेश्वर सिंह | 9701.9% | |
| 6 | कारलुस खलखो निर्दलीय | निर्दलीय | 3710.7% |
| 7 | विलियम मिंज निर्दलीय | निर्दलीय | 3180.6% |
| 8 | अथनास निर्दलीय | निर्दलीय | 3180.6% |
| 9 | भुवनेश्वर निर्दलीय | निर्दलीय | 3100.6% |
| 10 | मार्टिन अनूप निर्दलीय | निर्दलीय | 1080.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, एक निर्दलीय और एक निर्दलीय को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.62 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
तपकरा से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने 1985 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 49.8% से बढ़कर 54.6% हो गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1985 के 50.6% से बढ़कर 53.8% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।