पिपरियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
मुरली धर महेश्वरी (मुरली भैया) (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 48.3% वोट पाकर पिपरिया सीट जीती और सुरेश कुमार (INC) को 3,148 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 222 बुधनी थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 222 जावरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। मुरली धर महेश्वरी (मुरली भैया) 4.9% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
12 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मुरली धर महेश्वरी (मुरली भैया) | 31,20148.3% | |
| 2 | सुरेश कुमार | 28,05343.5% | |
| 3 | प्रवीन सिंह ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 9691.5% |
| 4 | घुरन वाडले तांत्रिक | 8791.4% | |
| 5 | भगवान भैया निर्दलीय | निर्दलीय | 7631.2% |
| 6 | सरोज भदौरिया JNP(JP) | JNP(JP) | 6891.1% |
| 7 | एन. के. महेश्वरी निर्दलीय | निर्दलीय | 6171.0% |
| 8 | शंकर सिंह पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 4420.7% |
| 9 | आर. के. पटेल निर्दलीय | निर्दलीय | 4090.6% |
| 10 | रतन कुमारी निर्दलीय | निर्दलीय | 2980.5% |
| 11 | राधे श्याम गुप्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 1640.3% |
| 12 | हीरा लाल वर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 770.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP, INC और एक निर्दलीय को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2003 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2003 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पिपरिया से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 47.0% से बढ़कर 52.4% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।