केवलारीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
नेहा सिंह (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 52.5% वोट पाकर केवलारी सीट जीती और विमला वर्मा (INC) को 7,064 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 211 घोड़ाडोंगरी थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 211 बदनावार है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नेहा सिंह | 37,47552.5% | |
| 2 | विमला वर्मा | 30,41142.6% | |
| 3 | गिरधारी | 1,8402.6% | |
| 4 | गणपत JNP(JP) | JNP(JP) | 7011.0% |
| 5 | लीला तिवारी निर्दलीय | निर्दलीय | 3530.5% |
| 6 | भागवत सिंह उइके KSM | KSM | 1890.3% |
| 7 | रामाधार निर्दलीय | निर्दलीय | 1700.2% |
| 8 | साखू लाल GNP | GNP | 1070.1% |
| 9 | शशि कुमार मेहरा निर्दलीय | निर्दलीय | 830.1% |
| 10 | अशोक कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 660.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.18 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
केवलारी से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BJP की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 48.2% से बढ़कर 61.7% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।