दंतेवाड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
बरसा दुलाराम (CPI) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 47.5% वोट पाकर दंतेवाड़ा सीट जीती और सुकु राम कश्यप (INC) को 4,644 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 154 बैहर थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 154 बरेली है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — बरसा दुलाराम 15.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बरसा दुलाराम वाम दल | वाम दल | 14,30647.5% |
| 2 | सुकु राम कश्यप | 9,66232.0% | |
| 3 | गंगा राम बघेल | 4,66515.5% | |
| 4 | मांजरा गगरू धुर्वा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4034.7% |
| 5 | सोनू राम सोढ़ी निर्दलीय | निर्दलीय | 1120.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPI, INC और BJP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.83 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दंतेवाड़ा से कौन जीता, 1977–1998
CPI ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; CPI ने यहाँ पिछली बार 1980 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1985 के 26.9% से बढ़कर 34.4% हो गया। इसके बाद 1993 के चुनाव में भी CPI ने यह सीट अपने पास रखी।