इंदौर-Vविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
सुरेश सेठ (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 48.6% वोट पाकर इंदौर-V सीट जीती और रामचन्दर वर्मा (INC) को 418 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 274 बड़वानी थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से कोई सीट नंबर 274 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
इंदौर-V का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 418 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुरेश सेठ निर्दलीय | निर्दलीय | 31,27848.6% |
| 2 | रामचन्दर वर्मा | 30,86048.0% | |
| 3 | जगन्नाथ भारती वाम दल | वाम दल | 8131.3% |
| 4 | मंशाराम भार्गव निर्दलीय | निर्दलीय | 6471.0% |
| 5 | विनोद बसेर निर्दलीय | निर्दलीय | 3950.6% |
| 6 | लखनसिंह रघुवीर निर्दलीय | निर्दलीय | 2830.4% |
| 7 | दाउद नबीबक्श निर्दलीय | निर्दलीय | 740.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और INC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.14 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
इंदौर-V से कौन जीता, 1977–1998
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1980 के 45.7% से बढ़कर 46.8% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।