चांपाविधान सभा उपचुनाव का परिणाम, 1979
एम.एम. सिंह (JNP) ने 1979 के विधान सभा उपचुनाव में 45.3% वोट पाकर चांपा सीट जीती और के.पी. राठौर (INC) को 484 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 122 बिंद्रानवागढ़ थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 122 बरघाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
चांपा का फ़ैसला सिर्फ़ 1.0% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 484 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | एम.एम. सिंह | 21,67145.3% | |
| 2 | के.पी. राठौर | 21,18744.3% | |
| 3 | बी. भगवान निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0704.3% |
| 4 | बी. सोनी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0312.2% |
| 5 | पुनिराम निर्दलीय | निर्दलीय | 7931.7% |
| 6 | बी. श्रीवास्तव (डब्ल्यू.) निर्दलीय | निर्दलीय | 7451.6% |
| 7 | एस. और्यवंशी निर्दलीय | निर्दलीय | 3070.6% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JNP, INC और एक निर्दलीय को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.47 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।