रौनविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
रसाल सिंह (JNP) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 47.6% वोट पाकर रौन सीट जीती और प्रेम कुमारी राजे (INC) को 11,843 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 13 लहार थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 13 गोहद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — रसाल सिंह 28.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रसाल सिंह जनता | जनता | 20,14947.6% |
| 2 | प्रेम कुमारी राजे | 8,30619.6% | |
| 3 | झंडा सिंह वाम दल | वाम दल | 5,60813.3% |
| 4 | गुलाब सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3,5218.3% |
| 5 | भगवान स्वरूप (मुनीम) निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4783.5% |
| 6 | रोशन लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2513.0% |
| 7 | सोपत प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0812.5% |
| 8 | लोटन निर्दलीय | निर्दलीय | 9442.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.42 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
रौन से कौन जीता, 1977–2003
इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट JNP(SC) ने जीती।